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परीक्षा प्रणाली

परीक्षा प्रणाली

उत्तराखंड विद्यालयी परीक्षा प्रणाली एवं मूल्यांकन संरचना

उत्तराखंड विद्यालयी शिक्षा परिषद (UBSE) के अंतर्गत आने वाले सरस्वती विद्या मंदिर और विवेकानंद बालिका इंटर कॉलेज जैसे संस्थानों में शैक्षणिक गुणवत्ता और छात्रों के सर्वांगीण मूल्यांकन के लिए एक सुव्यवस्थित परीक्षा प्रणाली का पालन किया जाता है।

उत्तराखंड परीक्षा प्रणाली की भूमिका (Introduction)
  • उत्तराखंड विद्यालयी शिक्षा परिषद (UBSE): प्रदेश के माध्यमिक एवं उच्च माध्यमिक विद्यालयों में पाठ्यक्रम निर्धारण, परीक्षा संचालन और परिणाम घोषित करने का कार्य उत्तराखंड बोर्ड द्वारा किया जाता है।

  • निरंतर एवं व्यापक मूल्यांकन (CCE): बोर्ड प्रणाली का मुख्य उद्देश्य केवल वार्षिक परीक्षा तक सीमित न रहकर वर्ष भर छात्रा/छात्र के शैक्षणिक व सह-शैक्षणिक विकास का मूल्यांकन करना है।

  • नैतिक एवं प्रायोगिक संतुलन: परीक्षा प्रणाली में सैद्धांतिक ज्ञान (Theory) के साथ-साथ प्रयोगात्मक (Practical) और आंतरिक मूल्यांकन (Internal Assessment) का उचित संतुलन रखा जाता है।

परीक्षा प्रणाली एवं मूल्यांकन के प्रमुख बिंदु
  1. त्रैमासिक एवं अर्धवार्षिक परीक्षाएं (Quarterly & Half-Yearly Exams):

    • शैक्षणिक सत्र की शुरुआत के बाद विद्यार्थियों के नियमित मूल्यांकन हेतु प्रथम त्रैमासिक (First Term) और अर्धवार्षिक परीक्षाएं आयोजित की जाती हैं।

    • इससे विद्यार्थियों को अपनी कमजोरियों को पहचानने और वार्षिक परीक्षा से पहले सुधार करने का अवसर मिलता है।

  2. प्री-बोर्ड परीक्षाएं (Pre-Board Examinations):

    • कक्षा 10वीं और 12वीं की बोर्ड परीक्षाओं से पहले विद्यालय स्तर पर प्री-बोर्ड परीक्षा आयोजित की जाती है।

    • इसका प्रारूप पूरी तरह से उत्तराखंड बोर्ड (UBSE) के वार्षिक प्रश्न-पत्र के पैटर्न पर आधारित होता है।

  3. वार्षिक एवं बोर्ड परीक्षाएं (Annual & Board Exams):

    • कक्षा 6 से 9 एवं 11 की वार्षिक परीक्षाएं विद्यालय स्तर पर आयोजित की जाती हैं।

    • कक्षा 10 (हाईस्कूल) और 12 (इंटरमीडिएट) की बोर्ड परीक्षाएं उत्तराखंड शिक्षा परिषद द्वारा निर्धारित केंद्रों पर आयोजित होती हैं।

  4. प्रायोगिक एवं मौखिक परीक्षा (Practical & Viva-Voce):

    • विज्ञान (भौतिक, रसायन, जीव विज्ञान), भूगोल और कंप्यूटर जैसे विषयों के लिए प्रयोगात्मक परीक्षाएं आयोजित की जाती हैं।

    • छात्रों के प्रयोगात्मक कौशल, लैब रिकॉर्ड और मौखिक प्रश्नों के आधार पर अंक प्रदान किए जाते हैं।

  5. आंतरिक मूल्यांकन एवं प्रोजेक्ट कार्य (Internal Assessment & Project Work):

    • बोर्ड के नए दिशानिर्देशों के अनुसार विषयों में प्रोजेक्ट वर्क, असाइनमेंट और उपस्थिति (Attendance) के आधार पर 20% तक अंक आंतरिक मूल्यांकन से जुड़ते हैं।

  6. उपस्थिति एवं अनुशासन की अनिवार्यता (Attendance & Discipline):

    • मुख्य या बोर्ड परीक्षा में बैठने के लिए कम से कम 75% उपस्थिति अनिवार्य होती है।

    • परीक्षा के दौरान अनुशासित आचरण और नियमावली का पालन करना आवश्यक है।

  7. कंप्यूटरीकृत एवं पारदर्शी परीक्षा प्रबंधन (Computerized Management):

    • परीक्षा फॉर्म भरने, प्रवेश पत्र (Admit Card) जारी करने और अंक तालिका (Marksheet) तैयार करने के लिए आधुनिक स्कूल मैनेजमेंट सॉफ्टवेयर का उपयोग किया जाता है।

  8. अभिभावक-शिक्षक बैठक (PTM & Progress Report):

    • प्रत्येक परीक्षा के परिणाम के बाद अभिभावक-शिक्षक बैठक का आयोजन होता है, जहाँ प्रगति रिपोर्ट (Progress Card) साझा की जाती है ताकि अभिभावक भी बच्चे की पढ़ाई पर ध्यान दे सकें।

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